हमारी परिवहन व्यवस्था और कानून
हमारी परिवहन व्यवस्था सुलभ,सस्ता और तय समय पर पहूंचने की गारंटी वाली नही है।अबादी और वाहनों के अनुपात में सड़कों का विकास नही हुआ है।इसी व्यवस्था दोष के कारण निजी वाहनों का चलन बढ़ा है। ट्रैफिक दोष के कारण व्यवसायिक वाहनों का दिन टूटने से ऋणों का किस्त एवं ससमय वाहनों का कागजात भी अद्यतन कराने में असमर्थ हो रहे हैं।एकमात्र परिवहन विभाग है जो अग्रिम रोड टैक्स समेत वाहनों से संबंधित कागजातों का शुल्क अग्रिम जमा नही करने पर जुर्माना भी लेता है।बढती निजी गाड़ियों एवं अव्यवस्थित ट्रेफिक प्रणाली से पेट्रोल व डीजल की खपत बढ़ने से पर्यावरण का नुकसान पहुंचता ही है,साथ ही साथ अपेक्षाकृत ज्यादा विदेशी मुद्रा भी खर्च करने पड़ते हैं। विकशित देशों में चार से आठ लेन बाली सड़कें या मल्टी यूटिलिटी वाला ओभरब्रिज वाली सड़कें हैं। वहां आधुनिक ओटोमेटिक सिगलनिंग प्रणाली के द्वारा जाम लगने की संभावना से पहले ही मल्टीयूटिलिटी वाला ब्रिज की ओर या वैकल्पिक रास्ते की तरफ गाड़ी के उंचाई,वजन के अनुसार सिगनल डाईभर्ट हो जाता है। कयी देशों में जाम के कारणों का अनुसंधान कर तुरंत जरूरी इंतजाम शुरू हो जाता है और समाधान दूर होने तक वाहनों का रजिस्ट्रेशन और प्रवेश करने पर आवश्यकतानुसार रोक लगा दिया जाता है।
कयी देशों में दुर्धटनाओं के कारणों का हर दृष्टिकोण से विस्तृत जांच होता है। दुर्धटनाओं मे मरने या धायल होने से देश और उसके परिवार के नुकसान का आकलन कर मुवावजा तय कर सभी तरह की क्षति का भरपाई किया जाता है,जबकि हमारे देश में सरकार को सिर्फ टैक्स और जुर्माना लेने तक ही ध्यान देती है। सरकारी गाडिय़ों पर भी मोटर भेकिल एक्ट लागू है ,लेकिन इस एक्ट के उलंधन होने पर कारवाई या जुर्माना लगते दिखाई दिया है?कोई भी पूरानी सरकारी गाड़ियों का प्रदूषण जांच करते,इंसूरेंस व फिटनेस पेपर बनाते नही देखा गया है।कानूनी कार्रवाई एवं जुर्माना निजी व कामर्सियल वाहनों पर ही होती है।
विकसित देशों की सड़कें इतनी मजबूत बनाई जाती है कि मालवाहक वाहनों को ओभरलोंडिंग जुर्माना लेने का प्रावधान ही नही है,सिर्फ ज्यादा लोड करने से अपेक्षाकृत ज्यादा धूंआ निकलने के कारण पर्यावरण की क्षति का आकलन कर दंडित किया जाता है।
भारत मे रोड टैक्स देने के वावजूद भी अच्छी सड़कें और सुविधाएं देने नाम पर टोल टैक्स लिया जाता है। यहां मालवाह वाहनों से ओभरलोंडिंग का अलग से चार्ज या जुर्माना लिया जाता है।वाहन जांच अधिकारियों द्वारा भी इसके अतिरिक्त ओभरलोंडिंग का जुर्माना वसूलते हैं,जो कि भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।संविधान में लिखा
हुआ है कि एक अपराध के लिये एक तरह का ही सजा या जुर्माना किया जा सकता है। टोल संग्रह केन्द्र पर ओभरलोंडिंग जुर्माना देने के बाद भी वाहन जांच अधिकारियों द्वारा ओभरलोंडिंग का जुर्माना लेना न्यायोचित नही है।इसतरह से परिवहन विभाग के नीतियों की वजह से एक मुर्गा कयी बार हलाल हो रहा है,जो कि संविधान के मौलिक अधिकार का हनन है।यह मामला कोर्ट मे जाएगा तो निश्चित तौर पर या तो MVI एक्ट का ओभरलोडिंग जुर्माना लागू रहेगा या टाल टैक्स का। टाल टैक्स लेने के बदले में सुविधाएं भी देना है,जैसे वेहतर बाधा रहित सड़कें, दुर्धटनाग्रस्त वाहनों की सुरक्षा,घायलों के लिए सभी सुविधाओं से लैश एंबूलेंस,ट्रोमासेंटर,घायलों को निकालने के लिए गैस कटर समेत दमकल आदि सभी साधनों को रखकर आवश्यतानुसार आपातकालीन सेवा देना है। भारत में नागरिकों पर भारी जुर्माना का वोझ नया मोटर भेकिल माध्यम से डाल दिया गया है, लेकिन साधन- संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने का जिक्र नही किया गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह एक्ट जनता के जेबों से धन छीनने के लिए बनाया गया है।
भारत मे कम प्रदूषित करने बाला, सस्ता,कम रखरखाव वाला जलमार्गों के लिए अनुकूल संसाधन रहने के बाद भी विकसिक नही होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
बीमा कंपनियों के हितों के लिए एमभीआई एक्ट में गाड़ियों का बीमा कराना अनिवार्य किया गया है।कयी देशों में वाहनों का बीमा कराना या ना कराना वाहन मालिको के मर्जी पर छोड़ दिया जाता है।बीमा कंपनियां बीमा करते समय सिर्फ वाहन का आनरबुक देखकर करती है,जब क्लेम देने की बारी आती है तो वाहनों से संबंधित सभी कागजात अद्यतन रहने की शर्त लगाकर क्लेम नही देने का बहाना बनाना शुरु देती है।इस पर सरकार ध्यान नही देती है और थर्ड पार्टी प्रीमियम मे बेतहाशा वृद्धि करने का आदेश सरकार तुरंत पारित कर देती है।बीमा कराते समय फिटनेस की मांग नही करने से जाहिर होता है बीमा क्लेम मे भी फिटनेश की मांग करना सही नही है, फिर भी बीमा कंपनियां ऐसा शर्त क्यों लगाती है?अभी तक बीमा रहित वाहनों से किसी का जानमाल की क्षति होती है तो वाहन मालिक इस परिस्थिति का मुकाबला स्वंग करता है और सरकार किसी प्रकार की मदद वाहन मालिकों को नहीं करती है तो बीमा रहित वाहनों के लिए जुर्माना का प्रावधान क्यों किया गया?
।विदेशों का देखा देखी एमभीआई संशोधन बिल सरकार बनाकर लागू कर दिया है, लेकिन वहां की जाम की स्थितियों ,तय समय पर पहूंचने की गारंटी,अच्छी सड़कें की तुलना इस आयायतित कानून मे नही की है,फिर भी ओभरस्पीड , एंबूलेंस को जल्द रास्ता नही देने एवं खतरनाक ढ़ग से वाहन परिचालन पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान कर दिया गया है। सरकार ने वाहन निर्माताओ को निर्धारित स्पीड से ज्यादा वाला गाड़ी बनाने ही क्यों देती है? दूसरी ओर सरकार रोड टैक्स देने के वावजूद अच्छी गति वाली सड़कें के नाम पर टोल टैक्स भी वसूलती।
रूकावट रहित वाहनों के परिचालन के लिए सड़कों की चौड़ाई निर्धारित है। सड़क के बगल में ही निर्धारित चौड़ाई वाली पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ का रहना भी अनिवार्य है। भीड़भाड़ इलाके या जहां ट्रैफिक लोड ज्यादा रहता है, वहां सड़क पार करने के लिए सिगनलिंग, अंडरपास और ओभरब्रिज की व्यवस्था भी करना होता है। सड़कों की सफाई करना जरूरी होता है,क्योंकि सड़क पर उड़ने वाला डस्ट भी वायु प्रदूषण है। प्रदूषण जांच केंद्रों पर दुगुना राशि लेकर प्रमाण पत्र दिया जा रहा है।इसके लिए सीधा जिम्मेदार जिले के परिवहन पदाधिकारी हैं,क्योकि विभिन्न तरह के वाहनों के लिए प्रदूषण जांच शुल्क निर्धारित है, प्रदूषण जांच केंद्रों पर तय दर का वोर्ड लगा देखना परिवहन विभाग का काम है।
अतः जिस तरह से नये कानून के तहत चलान काटने का भारी जुर्माना लगाने का नियम यह कहकर लगाया गया है कि इससे लोग सतर्क होकर वाहन चलाएंगे और दुर्धटनाओ मे कमी आयेगी।ठीक इसी तरह सभी वाहन धारियों और आमलोगों का अधिकार बनता है कि सभी सड़कों के बगल में फूटपाथ नही दिखे और खराब सड़कें दिखाई पड़े तो संबंधित विभाग को लिखें और बात नही बनती है तो रिमाइंडर भेजें ताकि इसकारण से होने वाले दुर्घटना के लिए भविष्य में जिम्मेदार ठहराया जा सके।
एमभीआई एक्ट की धारा 84 के तहत सड़कों के तय मानक और मेनटेनेंस में कमी रहने पर संबंधित ओथोरिटी पर एक लाख रूपए जुर्माना लगाने का नियम बनाया गया है।इस वजह से जिम्मेदार कितने ओथोरिटी पर फाईन हुआ है?
आपके गाड़ी का सभी पेपर और डीएल अद्यतन है,तो वाहन जांच के समय पेपर नही है तो तुरंत चलान नही काट सकता है। तत्काल आप गाड़ी का सीजर लिस्ट एवं समय की मांग कर गाड़ी वहीं या संबंधित थानों में छोड़कर पेपर लाकर दिखा सकते हैं।सीजर लिस्ट लेते समय देख कर संतुष्ट हो जांय कि किस प्रकार का मोटर वाहन अधिनियम का धारा लगाया गया है।अगर वैसा धारा लगाया गया हो, जिसका आपने उलंधन नही किया है तो आप उसका सबूत मांग सकते हैं।अगर सभी कागजात अद्यतन है तो ज्यादा से ज्यादा समय पर कागज नहीं दिखाने का ही फाईन किया जा सकता है। वाहन चालक अपना हस्ताक्षर सीजर लिस्ट पर अवश्य करें ताकि यह सबूत रहे कि मैं ही गाड़ी चला रहा था और डीएल लाकर दिखाकर इसके फाईन से बच सके।अगर पास में डीएल है तो दिखा दें ताकि सीजर लिस्ट में इसका जिक्र नही हो सके है। बिहार परिवहन विभाग के आदेशानुसार आप अपने वाहनों का पेपर एंड्रॉयड मोबाइल के डिजीलोकर में सेभ पेपर वाहन जांचकर्ता को दिखा सकते हैं।या एम परिवहन एप के जरिए भी अपने वाहनों का कागजात और डीएल दिखा सकते हैं।स्वअभिप्रमाणित पेपर दिखाकर भी सरकारी एप के माध्यम से मिलान करने का दबाव डाल सकते हैं।
विदेशों में ट्रेफिक उलंघन करने पर वाहन मालिक के पास जुर्माना चलान की डीटेल प्रति भेज दिया जाता है।एंबूलेंस को रास्ता देने में विलंब, ओभरस्पीडिंग,खतरनाक और रेकलेश ड्राइविंग करने पर भी भाड़ी जुर्माना लगाया है।इसे कैसे साबित किए जाएंगे ? ना तो भारत के सभी सड़कों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और ना वाहन जांच कर्ता के पास कैमरा और ओभरस्पीडिंग जांच मशीन है।फिर तो अगर मनवाने तरीके से ओभरस्पीडिंग,रेकलेश व खतरनाक ड्राइविंग और हेलमेट लगे रहने के वावजूद इससे संबंधित धारा लगाने से मारपीट और अव्यवस्था का सामना किया जा सकता है।वगैर पूर्ण तैयारी व संसाधन उपलब्ध किए भारी जुर्माना लगाना इस बात की पुष्टि होती है कि राजस्व संग्रह करने लिए लागू किया गया। भारत में वाहनों के आरसी, फिटनेस (सिर्फ वाणिज्यिक वाहनों के लिए ) धूंआ परमिट, टैक्स,एवं इंसूरेंस की आनलाईन बगैर पेपर मांगे देखने की व्यवस्था नही की गई है।भारत में सिर्फ कुछ नयी गाड़ियों का टैक्स,आरसी, फिटनेस, इंसूरेंस एप के जरिए देखा जा सकता है। इंसूरेंस धूंआ परमिट दूबारा रेन्यूल कराने के बाद भी vahan nic और अन्य app पर देखने की व्यवस्था नही किया गया है, जबकि लगभग देश भर के सभी परिवहन कार्यालय आनलाईन हो चुका है। पहले नयी गाड़ियों का दो साल तक प्रदूषण (धुंआ परमिट) और कांमर्शियल गाड़ियों के लिए फिटनेस बनाने की आवश्यकता नही थी। पूरानी गाड़ियों का फिटनेस प्रत्येक साल रीएन्यूल होता था,जिसे अब दो साल मे कराने का नियम किया गया है। अब बिहार मे नयी गाड़ियों का आठ सालों के लिए फिटनेस बनाना अनिवार्य नही होगा। नियमत: फिटनेस और रोड परमिट सिर्फ कांमर्शियल वाहनों का बनाना अनिवार्य है।
जिले वरीय अधिकारी व मजिस्ट्रेट ,ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी ही सभी तरह के वाहनों का जांच कर सकता है। बिहार परिवहन विभाग के अधिसूचना के द्वारा एएसआई रैंक तक के पुलिस को दो पहिया वाहनों की सभी तरह की जांच और चार पहिया वाहनों के सीट बेल्ट पहनने तक जैसे सीमित वाहन जांच करने और जुर्माना करने का आदेश दिया है। बिहार सरकार ने पुलिस को परिवहन विभाग के जरिए जुर्माना रसीद मुहैया कराया है लेकिन वैसे वाहन चालकों जिसके पास जुर्माना देने में तत्क्षण समर्थ नही है, वैसे लोगों के लिए सीजर लिस्ट देने की व्यवस्था संभवतः नही किया गया है?सीजर लिस्ट लेना वाहन चालकों का अधिकार है। इस समस्याओ का निदान किए वगैर वाहन जांच करना न्यायोचित है?।पुलिस सभी वाहनों को विधि व्यवस्था के लिए वाहनों की तलासी ले सकता है, लेकिन सभी प्रकार के वाहनों का पेपर जांच नही कर सकता है।
वाहन जांच के समय कोई भी जांच कर्ता और उसके गार्ड (जवान )वाहन चालक के जेब में हाथ ,मारपीट,और दुर्व्यवहार नही कर सकता है,यदि ऐसा करता है,तो लिखित शिकायत कर उसे दंडित करवा सकते हैं।
ट्रांसपोर्ट व्यवसाय खत्म होने कगार पर
उद्योगहीन बिहार की अधिकांश ट्रकें बालू एवं गिट्टी लादकर चलती है। ट्रांसपोर्ट व्यवसाय खत्म होने का प्रमुख कारण खनन और परिवहन के कार्यशैली से ओभरलोड वाहनों का परिचालन होना है।
खनन क्षेत्रों (बालू एवं गिट्टी)में खनन विभाग द्वारा वाहनों को निर्धारित क्षमतानुसार जिम्मेदारी पूर्वक माल देने की कारगर व्यवस्था नही करती है।खनन विभाग के लचर व्यवस्था से वाहन ओभरलोड कर दिए जाने से परिवहन विभाग द्वारा जुर्माना वसूला जाता है।इस विभाग के उदासीन रवैया से निर्धारित दर से अधिक बालू का दाम खदान क्षेत्रों में लिया जाता है, जिसका सीधा असर वाहन मालिकों और उपभोक्ताओं पर पड़ता है।खदानो में निर्धारित क्षमतानुसार लोडिंग समेत बालू का दाम लिखा हुआ साइन वोर्ड टंगा नही रहता है।इस विभाग के निक्रियता के कारण ही ओभरलोडिंग एवं अवैध बालू का परिवहन होता है।
इसलिए खदान क्षेत्रों में वाहनों को निर्धारित क्षमता से अधिक माल नहीं लोड हो सके,इसकी जबावदेही तय होनी चाहिए।अगर संबंधित खनन क्षेत्रों में ओभरलोड माल किसी वाहन पर पकड़ी जाय तो उस खनन क्षेत्र के जिम्मेदार सरकारी व गैर सरकारी लोगों से जुर्माना वसूलने का प्रावधान बननी चाहिए,क्योंकि ट्रक वाला समझी ना समझी में कीमत भुगतान कर माल खरीदता है।
दूसरे राज्यों के खनन क्षेत्रों में माइनिंग चलान देने की समुचित व्यवस्था नही रहने के कारण मजबूरी में बिना माइनिंग चलान लिए गिट्टी लोड ट्रक बिहार में प्रवेश कर जाता है।अगर वहां यदा -कदा चलान मिलता भी है तो निर्धारित मूल्य से अधिक लिया जाता है।
उपरोक्त समस्या से निपटने के लिए बिहार सरकार को पड़ोसी राज्यों से बिहार में प्रवेश करने बाले स्थान(बोर्डर)पर माइनिंग शुल्क लेने की व्यवस्था करना चाहिए अथवा दूसरे राज्यों से निर्धारित क्षमता से गिट्टी बालू लाने बाले वाहनों को जुर्माना लेने के नियमों को शिथिल कर दिया जाना चाहिए।इस तरह के वाहनों के पहचान के लिए आनलाइन या आफलाइन ट्रांजिट इंट्री पास जारी करने की व्यवस्था करना चाहिए।
रेलवे द्वारा भी दूसरे प्रदेशों से गिट्टी बिहार आता है।इसमें माइनिंग चलान के नाम पर खानापूर्ति किया जाता है। इसमें लोग माल के क्षमतानुसार चलान नही लेता है। ऐसी भी खबरें मिलती है कि वगैर माइनिंग चलान एवं बिहार सरकार के बगैर अनुमति/जानकारी के रेलवे द्वारा भारी पैमाना पर गिट्टी बिहार ले आया जाता है।
उपरोक्त कारणों से भी ट्रक व्यवसाय प्रभावित हुआ है।
परिवहन विभाग के अपारदर्शी वाहन जांच के परिणामस्वरूप ही कई जिलों से गुजरकर ओभरलोड वाहन गंतव्य स्थानों पर पहुंच रहा है।इस कारण से सड़क पुल पुलिया क्षतिग्रस्त हो रहा है।जिले के परिवहन विभाग के वाहन जांच अधिकारियों को जब मन चाहे जहां तहां भारी वाहनों की औचक ओभरलोडिंग जांच करने से पारदर्शी वाहन जांच करना और ओभरलोडिंग रूकना संभव नही है। क्योंकि भ्रष्ट वाहन जांच अधिकारियों का इंट्री माफिया के द्वारा उचित माध्यम से गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर दे देने के कारण औचक जांच के क्रम में वैसे वाहनों को देखकर ओभरलोड रहने के वावजूद भी बेरोकटोक जाने दे दिया जाता है।इस तरह के वाहन जांच में वैसे वाहन ही जप्त होते हैं,जो नजायज इंट्री नही कराते हैं।इसतरह से ओभरलोडिंग जारी रहने निर्धारित क्षमता से वाहन चलाने वाले को व्यपार मे हानि होने से मजबूरी में अवैध इंट्री देकर ओभरलोडिंग कर चलाने के लिए बाध्य होते हैं।चलंत भारी वाहनों का ओभरलोडिंग जांच करने के लिए खदेरकर रोकने के क्रम मे कयी बार दुर्घटनाए भी धटित हो चुकी है।
इसलिए जिले के परिवहन विभाग के वाहन जांच अधिकारियों को भारी वाहनों का ओभरलोडिंग का औचक जांच जब मन तब यत्र तंत्र करने पर अविलंब रोक लगनी चाहिए।इसके बदले में प्रत्येक जिला में स्थल चयन कर (निर्धारित जगहों पर ही) ,जहां ओभरलोडिंग जांच की समुचित सुविधा हो, वहां लगातार ओभरलोडिंग जांच सुनिश्चित करने से ही पारदर्शी वाहन जांच संभव हो सकता है।चलती ओभरलोड वाहनों को जांच करने से इसलिए भी रोका जाना चाहिए,क्योंकि कयी जिलों में इस तरह से जांच करने से दुर्घटना होने से जान माल का नुक़सान हो चुका है।
अन्य वैकल्पिक माध्यमों से भी ओभरलोडिंग रोका जा सकता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित टाल संग्रह केंद्रों पर, जहां सभी तरह की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध रहती है। यहां पारदर्शी ढंग से वाहनों की ओभरलोडिंग समेत सभी प्रकार के वाहनों का कारगर सतत पारदर्शी जांच आसानीपूर्वक किया जा सकता है।
पड़ोसी राज्यों से लगी सीमा इंट्री पोइंट(वोडर)पर दूसरे प्रदेशों से आने वाली ओभरलोड वाहनों को बिहार में प्रवेश करने से निषेध करने से भी ओभरलोंडिंग को रोका जा सकता है।
अवैध इंट्री सरगना का भ्रष्ट वाहन जांच अधिकारियों के नेटवर्क को खत्म करने से भी ओभरलोडिंग रूक सकता है।
ओभरलोडिंग रोकने के लिए परिवहन और खनन विभाग पर जबावदेही तय करने से भी ओभरलोंडिंग रूक सकती है।
खनन विभाग के नकामी व लापरवाही से यदि परिवहन विभाग ओभरलोड वाहन को जप्त करता है तो माइनिंग विभाग के जबावदेह कर्मचारी व अधिकारी पर भी जुर्माना व सजा मिलना चाहिए।हर हाल मे वाहन मालिक को या तो परिवहन विभाग या माइनिंग मे से किसी एक विभाग द्वारा जुर्माना भुगतान करने का प्रावधान होना चाहिये, क्योकि हमारा संविधान कहता है कि एक तरह के जुर्म के लिए एक से अधिक दंड नही दिया जा सकता है।या तो टाल संग्रह वाले ओभरलोंडिंग का जुर्माना लेना चाहिए या परिवहन या खनन विभाग को ही।
इसप्रकार से परिवहन व्यवसाय खत्म होने से इससे जुड़े लाखों लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच गये हैं। ट्रक मालिक किस्त अदा करने , डान पेमेंट व बोडी खर्च डूबने की चिंता से परेशान हैं। कोई रास्ता दिखा नही रहा है। ट्रक मालिकों को रोडटैक्स, फिटनेस, इंसूरेंस आदि पेपर खड़ी गाडिय़ों का भी अद्यतन रखने की बाध्यता से आर्थिक नुकसान हो रहा है।इसलिए बिहार सरकार को रोड टैक्स, फिटनेस, परमिट आदि कागजातों से संबंधित राहत देना चाहिए।केंद्र सरकार को वाहनों का थर्ड पाटी बीमा के दरों मे बढोतरी वापस लेने, टाल टैक्स खत्म या कम करने,डीजल के दामो और टायर के जीएसटी मे कमी करने,बैंकों व फाइनेंसर से राहत दिलाने का प्रयास करना चाहिए।
अमरीष कुमार, समाजकर्मी, खगड़िया, बिहार
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