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ट्रक यूनियन बेगूसराय और कहलगांव ‌(भागलपुर)के प्रति सहमति और आभार व्यक्त करता हूं जो दिनांक 1नवम्बर 2018 से निर्धारित क्षमतानुसार मालवाहक वाहनों को चलाने का निर्णय लिया है और जो ऐसा नहीं करेंगे ,वैसे वाहनो तथा इसके मालिकों पर शक्त कानूनी कारवाई की जाएगी। इससे कयी फायदे होगें- इंधन ,टायर कम खपत होगें।इंट्री यानि भ्रष्टाचार खत्म होगें। पुलिस वाले रूपये नहीं मांगेगा।प्रदूषण में भी कमी आयेगी। गिट्टी बालू तर्कसंगत दरों पर बिकेगें। ज्यातर खनन क्षेत्रों मे बालू और गिट्टी सीएफटी नाप से ही लोड और बिकती है,जो धर्मकांटा वजन में अपेक्षाकृत थोड़ा ओभरलोड हो जाता है।सरकार ने बालू गिट्टी की खरीद बिक्री का पैमाना धर्मकांटा वजन से तय नही किया है।इसी का फायदा माल खाये भ्रष्ट वाहन जांच अधिकारी धर्मकांटा वजन कराकर परेशान करेंगे ,ताकि अगली ट्रिप से नजायज इंट्री कराने के लिए मजबूर हो सके।, खनन विभाग की जिम्मेदारी बालू गिट्टी को धर्मकांटा वजन से ही लोड देने की है। कहीं भी क्रेशरों पर धर्मकांटा नहीं है। वहां सीएफट नाप से ही लोड होता है। दूसरे राज्यों से आने वाले गिट्टी का वजन वोडर पर वजन कराकर पार करने की जिम्मेवारी राज्य सरकार की है। लेकिन राज्य सरकार खुद इस पर गंभीर नही है,फिर भी ओभरलोडिंग रोकने का नाटक करती है।इसकारण से भुक्तभोगी मालवाहक वाहन मालिक परिवहन विभाग से परेशान होते हैं। इसपर भी ट्रक यूनियनों को सरकार और प्रसाशन से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास करना होगा। अगर कोई वाहन को टाल संग्रह केंद्र पर वगैर धर्मकांटा पर्ची का ओभरलोड चार्ज वसूलता है,तो नियमानुसार ओभरलोडिंग चार्ज नहीं देना चाहिए।अब तो नया नियम भी ओभरलोडिंग प्रतिशत के अनुसार ओभरलोडिंग चार्ज टाल केन्दों में देने आ गया है।पहले दोगुना राशि वसूली करने का नियम था। अगर कोई वाहन ओभरलोडिंग चार्ज टाल केन्द्रों पर भुगतान करता है,तो उस टाल क्षेत्रों में कोई भी वाहन जांच अधिकारी ओभरलोडिंग का जुर्माना नहीं कर सकता है, क्योंकि भारतीय संविधान कहता है कि एक अपराध के लिए एक ही बार दंडित किया जा सकता है। रात में विशेष परिस्थितियों और विधि व्यवस्था को छोड़कर डीटीओ रैंक के परिवहन विभाग के अधिकारी ही वाहनों को जप्त या फाईन कर सकता है।इससे कम रैंक के वाहन जांच अधिकारी वैसे वाहनों को जप्त या फाईन नहीं कर सकता जो केवल जुर्माने से संबंधित अपराध किया हो।अगर रात में डीटीओ से कम रैंक के अधिकारी वाहन को जप्त करें तो सीजर लिस्ट में समय ,स्थान और पदनाम अवश्य अंकित करवावें,ताकि न्यायालय से राहत मिल सके। यह कैसी विडम्बना है कि हम अपनी गाड़ी पर ओभरलोडिंग करके टायर घिसवाकर इंधन खर्च कर ,गाड़ी का आयु कम करके , रखरखाव बढ़ाकर अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा नजायज रूप से इंट्री करने वाले और पुलिस को दे देते हैं। कयी देशों की सड़के इतनी गुणवत्ता पूर्ण होती है कि सभी मालवाहक वाहन अपनी मर्जी क्षमता के हिसाब से लोड कर चल सकते हैं। वहां ओभरलोडिंग जुर्माना का प्रावधान नहीं है। ओभरलोडिंग चलने का प्रमुख कारण नजायज इंट्री है और ओभरलोडिंग जारी रहने से अंडरलोड चलने बाले वाहनों को उचित भाड़ा नहीं मिलने से घाटा होने के साथ-साथ भ्रष्ट जांच वाहन जांच अधिकारियों द्वारा परेशान करना भी है,तभी मजबूरी वश देखा देखी नजायज इंट्री फीस देकर ओभरलोडिंग करने के लिए बाध्य हो जाते हैं। जितना भी ओभरलोड करें नजायज इंट्री का दर प्रत्येक वाहनों का मंथली या ट्रिप के हिसाब से फिक्स है। इसलिए निर्धारित क्षमता से दो से तीन गुना अधिक ओभरलोडिंग करने के लिए बाध्य हो जाते हैं। अतः निर्धारित क्षमता से ट्रक चलाने से ही वाहन मालिक शारीरिक,मानशिक और आर्थिक रूप से मजबूत हो सकेगें।