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भगवान कहां से आते हैं?

मनुष्य अपना तकदीर कर्म से खुद बनाता ,  इसमें भगवान कहां से आता है? जीवन की उत्पत्ति रासायनिक गुण से होता , इसमें भगवान कहां से आता है? मृत्यु तभी होती है,जब शारीरिक अंग धिस जाता है, इसमे यमराज कहा से आता है? सिद्ध हो चुका रासायनिक क्रिया  मूल स्वरूप में नहीं आता है, फिर भी अंधविश्वासों में पड़कर  अगली पिछली जनमों की बातों में पड़कर  नमन करने भगवान कहां से आता है? विद्यार्थी जब स्वंग मनन कर गुरु जन से शिक्षा पाता है, तो फिर सरस्वती कहां से आती है? श्रम दलाली हेराफेरी कर, जब धन जमा हो सकता है तो लक्ष्मी गणेश कुबेर कहां से आता है? वैज्ञानिकों के जोश लगन से , वे नयी खोज करते हैं तो इसमें विश्वकर्मा जी कहां से आते हैं? जब सभी काम मनुष्य खुद ही करते तो भगवान कहां से आते हैं ? मानवों से मानवों पर जुल्म सितम होते हैं, तो भगवान  कहीं नही दिखते हैं?  तब थक-हार कर मानवीय व्यवस्था , कोर्ट शाशन प्रशाशन का सहारा लेते हैं  जप-तप करते फिर भी भगवान नही आते हैं? आधुनिक वैज्ञानिक युग में भी मानव मंदिर मस्जिद,गुरूद्वारा बनाकर पाखंडी सि...

भारतीय मीडिया

हर जिले में एक या दो व्यूरो चीफ को ही वेतन मिलता है।शेष सभी रीपोटर अवैतनिक कार्य करते हैं।इनका जीविका कैसे चलती होगी? अवैतनिक पत्रकार सरकार द्वारा दी जाने बाली सुविधा का लाभ नहीं उठा पाते हैं।प्रेस कॉन्फ्रेंस और न्यूज़ कवर करने और सरकारी कार्यक्रमों मे ज्यादातर अवैतनिक पत्रकार ही रीपोटिंग करते हैं। प्रशासनिक स्तर पर जगह विशेष के लिए पास भी अवैतनिक पत्रकारों को भी मुहैया कराया जाता है।लेकिन एडीटर और प्रबंधकों द्वारा अवैतनिक पत्रकारों को ना तो नियुक्ति पत्र दिया जाता है,और ना  तो पहचान पत्र मुहैया कराया जाता है। आज पत्रकार ,एडीटर चाहकर भी सरकार प्रशासन  और मालिक के दबाव मे पारदर्शी  सच्ची रीपोटिंग नहीं कर पाते हैं ।क्योंकि सरकार प्रशासन के विरूद्ध खबर छपने पर सरकारी विज्ञापन बंद करने का अंदेशा लगा रहता है ,सरकारी दबाव मे एडीटर तक को मालिक हटा देते हैं।इसकारण से मिडिया सरकार की चमचागिरी और जय-जयकार करते रहते हैं।भारत में मिडिया की धारणा बन गयी है सरकार और मजबूत राजनीति दल जो  फिलहाल विपक्ष में रहती,और समझ जाते हैं,अगामी सरकार इनकी हो सकती है, खबरों की प्राथमिकता इसी ...

🎉✨🎇💥एक दीप जलाऐं

एक दीप जलायें भ्रष्टाचार, बेईमानों, बेविचारी, कुकर्मी जुल्मी के खिलाफ। एक दीप जलायें उन्नत वृहत मुनाफा वाली खेती बारी और विज्ञान के लिए। एक दीप जलाएं श्रम, ज्ञान और मुनाफे की मर्यादा आधारित धन के लिए। एक दीप जलाएं महापुरुषों के लिए ,जो बिना वेतन भत्ते  लिए देश हित में संधर्ष किये। एक दीप जलाएं देश के जवानों के लिए ,जो विकट परिस्थितियों में भी आंतरिक और बाहरी सुरक्षा हमे प्रदान करती है। एक दीप जलाएं  सभी प्रकार के पाखंडपन ,अंधविश्वास, कर्मकांड और कुप्रथा के खिलाफ। एक दीप जलाएं शांति ,अमन और भाईचारा के लिए। एक दीप जलाएं वैज्ञानिकों के लिए,जिनके खोज से हम वर्तमान व्यवस्था रूपी जीवन जी रहे हैं। एक दीप जलाएं माता-पिता और गुरुजनों के सम्मान में। एक दीप जलाएं वैसे समाजसेवियों के सम्मान लिए जो वगैर निजी हित और वगैर पद के चाहत के देश समाज, संविधान क़ानून ,जल जमीन प्रर्यावरण की रक्षा करने के लिए निडर पूर्वक कार्य कर रहे हैैं। एक दीप जलाएं वैसे सभी छोटा बड़ा पदधारकों के सम्मान में जो अपने अपने कार्यक्षेत्रों/पदों पर रहकर वगैर पक्षपात के कर्त्तव...