भगवान कहां से आते हैं?
मनुष्य अपना तकदीर कर्म से खुद बनाता ,
इसमें भगवान कहां से आता है?
जीवन की उत्पत्ति रासायनिक गुण से होता ,
इसमें भगवान कहां से आता है?
मृत्यु तभी होती है,जब शारीरिक अंग धिस जाता है,
इसमे यमराज कहा से आता है?
सिद्ध हो चुका रासायनिक क्रिया
मूल स्वरूप में नहीं आता है,
फिर भी अंधविश्वासों में पड़कर
अगली पिछली जनमों की बातों में पड़कर
नमन करने भगवान कहां से आता है?
विद्यार्थी जब स्वंग मनन कर
गुरु जन से शिक्षा पाता है,
तो फिर सरस्वती कहां से आती है?
श्रम दलाली हेराफेरी कर, जब धन जमा हो सकता है
तो लक्ष्मी गणेश कुबेर कहां से आता है?
वैज्ञानिकों के जोश लगन से , वे नयी खोज करते हैं
तो इसमें विश्वकर्मा जी कहां से आते हैं?
जब सभी काम मनुष्य खुद ही करते
तो भगवान कहां से आते हैं ?
मानवों से मानवों पर जुल्म सितम होते हैं,
तो भगवान कहीं नही दिखते हैं?
तब थक-हार कर मानवीय व्यवस्था ,
कोर्ट शाशन प्रशाशन का सहारा लेते हैं
जप-तप करते फिर भी भगवान नही आते हैं?
आधुनिक वैज्ञानिक युग में भी मानव
मंदिर मस्जिद,गुरूद्वारा बनाकर
पाखंडी सिखंडी चलन धारण कर
विज्ञान को क्यों अपमानित करने
भगवान कहां से आते है?
धर्म कर्मकांड के पचरे में
तन मन धन समय की हानि होती है
इसकारण से जानवरों से बत्तर समझ
मानव में दिखने लगते हैं।
फिरभी इस बीच में भगवान कहां से लाते हैं?
सोचो समझो जानो मानव
जागरूक बनकर अंधभक्ति मिटाकर
सुख समृद्धि विकास का नया सवेरा लाना है।
जात पात धर्म से ऊपर उठकर
इसमें भगवान कहां से आता है?
जीवन की उत्पत्ति रासायनिक गुण से होता ,
इसमें भगवान कहां से आता है?
मृत्यु तभी होती है,जब शारीरिक अंग धिस जाता है,
इसमे यमराज कहा से आता है?
सिद्ध हो चुका रासायनिक क्रिया
मूल स्वरूप में नहीं आता है,
फिर भी अंधविश्वासों में पड़कर
अगली पिछली जनमों की बातों में पड़कर
नमन करने भगवान कहां से आता है?
विद्यार्थी जब स्वंग मनन कर
गुरु जन से शिक्षा पाता है,
तो फिर सरस्वती कहां से आती है?
श्रम दलाली हेराफेरी कर, जब धन जमा हो सकता है
तो लक्ष्मी गणेश कुबेर कहां से आता है?
वैज्ञानिकों के जोश लगन से , वे नयी खोज करते हैं
तो इसमें विश्वकर्मा जी कहां से आते हैं?
जब सभी काम मनुष्य खुद ही करते
तो भगवान कहां से आते हैं ?
मानवों से मानवों पर जुल्म सितम होते हैं,
तो भगवान कहीं नही दिखते हैं?
तब थक-हार कर मानवीय व्यवस्था ,
कोर्ट शाशन प्रशाशन का सहारा लेते हैं
जप-तप करते फिर भी भगवान नही आते हैं?
आधुनिक वैज्ञानिक युग में भी मानव
मंदिर मस्जिद,गुरूद्वारा बनाकर
पाखंडी सिखंडी चलन धारण कर
विज्ञान को क्यों अपमानित करने
भगवान कहां से आते है?
धर्म कर्मकांड के पचरे में
तन मन धन समय की हानि होती है
इसकारण से जानवरों से बत्तर समझ
मानव में दिखने लगते हैं।
फिरभी इस बीच में भगवान कहां से लाते हैं?
सोचो समझो जानो मानव
जागरूक बनकर अंधभक्ति मिटाकर
सुख समृद्धि विकास का नया सवेरा लाना है।
जात पात धर्म से ऊपर उठकर
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