बिहार के दो प्रमुख मुद्दे।

अगामी आम चुनावो में बिहार से संबंधित दो मुद्दे अहम है।

1.भारत सरकार के अंतराष्ट्रीय समझौते से नेपाल के कारण हर साल बाढ से होने बाली क्षतिपूर्ति का संभावित वजट का प्रावधान केन्द्रीय वजट में शामिल करें।ताकि बिहार सरकार को हर साल याचक बनकर आर्थिक मदद के लिए केन्द्र सरकार के पास गिरगिराना नहीं पड़े।आजतक भारत सरकार ने संपूर्ण बाढ का क्षतिपूर्ति नहीं दिया है।कई बार बाढ़ आने के बाद भी  केंद्र् सरकार ने किसी प्रकार का मदद नही की है। मदद किया भी है तो नगण्य।इस कारण से केंद्र के समझौते के कारण बिहार की जनता की कमाई का एक बड़ा हिस्सा प्रतिवर्ष घर मकान सड़क पुल पुलिया के नवनिर्माण और रखरखाव में खर्च हो जाता है। बिहार सरकार भी इसी काम में उलझी रहती है और बिहार का विकास रूपी पहिया अन्य राज्यों के अपेक्षाकृत धीरे चलता है।इसी का नतीजा है कि बिहारियों को रोजी-रोटी के लिए बाहर निकलना पड़ता है।


यह कैसी विडम्बना है कि समझौता भारत सरकार का है,और इसका खामियाजा बिहार सरकार को भुगतना पड़ता है।


2.संधीय व्यवस्था में भारतीय नागरिक देश-भर में कहीं भी स्थाई या अस्थाई रूप से रसबस सकते हैं। जहां लगे कि नैतिक रूप से जीवन जीने के लिए समुचित साधन अनूकूल हो।

आज देशभर में बिहारी अपमानित हो रहे हैं। बिहारी अपनी परिश्रम,ज्ञान बुद्धि के बल पर सभी क्षेत्रों में अग्रणी रहा है। बिहारी जहां भी रहता है, वहां इमानदारी और श्रम के बल पर उस राज्य के नवनिर्माण में अहम भूमिका निभाता है।

सर्वप्रथम बिहार सरकार बिहारी श्रमिकों की गणना करें कि बिहार छोड़कर रोजी-रोटी के कितने लोग बाहर जाते हैं।आकलन करने के बाद बिहार में ही ऐसी व्यवस्था करना चाहिए कि सभी लोग बिहार में ही रोजी रोजगार मुहैया हो सके।इसके लिए जो भी योजना तैयार हो इसके लिए भारत सरकार को आर्थिक मदद मिले।यह भी चुनावी मुद्दों में शामिल हो।


केंद्र और राज्य सरकार के पास अभी भी सुनहरा मौका है,इस दोनो मुद्दे पर यथाशीघ्र पहल करें।अन्यथा विपक्षी दल इस मुद्दे को लपककर सत्ताधारी दलों को चुनाव में नुकसान पहुंचा सकते हैं।


जिस जनसंख्या के अनुपात से भारत सरकार को बिहार से राजस्व मिलता है,उस अनुपात में बिहार को केन्द्रीय लाभांश बिहार सरकार को नही मिलती है।

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