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संविधान का उलंधन प्राय:हमारे जनप्रतिनिधि करते हैं, संविधान का शपथ लेकर गैर-कानूनी वयान देते और काम करते हैं। इसका मतलब ये संविधान और कानून की किताब उपलब्ध कराये बगैर झूठी शपथ लेते हैं।या जानबूझ कर इसकी मर्यादा तोड़ते हैं।या तो ये संविधान,कानून से अनभिज्ञ हैं।यह भी संभव है कि ये संविधान को पढ़ते नहीं हैं या पढवाकर समझने की कोशिश नही करते हैं। संविधान और कानून की जानकारी हेतू नव निर्वाचित प्रतिनिधियों को ट्रेनिंग देने की व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित हो। जनप्रतिनिधियों से संबंधित सभी कमजोर कड़ीयों को मजबूत कर इन पर जानबूझकर किया जाने बाला अपराध की जनप्रतिनिधित्व धारा में प्रावधान होना चाहिए। अगर ऐसी धारा मौजूद है,तो कार्रवाई होते देखने को नही मिला है। लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि देश का अगुवा(नेता)और अभिभावक होता है। इनके नेतृत्व का सीधा असर और सीख जनता पर पड़ता है। इसलिए हमसभी का दायित्व है कि मतदान करते समय जाति,धर्म भाषा की भावना से ऊपर उठकर खड़े उम्मीदवारों के बीच से ही बेहतर उम्मीदवार को वोट देकर जनप्रतिनिधि का चयन करें। कानून/संविधान से अनभिज्ञ जनता को कानूनी ,गैर कानूनी तथ्यों का एहसास नहीं होता है, क्योंकि अभी तक की किसी सरकारें ने संविधान/कानून की ग्रंथ हरेक परिवार को उपलब्ध नहीं कराई है।इसलिए धर्म ग्रंथ की भांति संविधान/क़ानून रूपी ग्रंथ भी आदर्श बन सके।संसद भी सभी का धर्मस्थल बन सके। इसलिए इसके पूजारी(सांसद) का चयन सोच विचार कर करना चाहिए।
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